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अरहर

कृषि कार्य :

  1. जमीन की तैयारी : दो-तीन बार खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा चला दें। गोबर की सड़ी खाद 5 गाड़ी प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में अच्छी तरह मिला दें। अरहर टाँड़ जमीन की फसल है, इस लिए खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए।
  2. बोआई के समय: अरहर की बोआई मध्य जून से मध्य जुलाई तक कर   

देनी चाहिये।

  1. उत्रत किसम:
उन्नत किस्में

बोआई की दूरी

तैयार होने का
  समय

औसत उत्पादन
  (क्विं.हे.)

    विशेष गुण

टी-21
बी. आर.65
बिरसा अरहर-1
बहार, शरद
नरेन्द्र अरहर-1
एवं लक्षमी

50x15 सें.मी.
60 x20 सें.मी.
75 x25 सें.मी.

150 दिन
180 दिन

220 दिन

8-10
12-15

20-25

जल्द तैयार होने वाली किस्म
मिश्रित खेती के लिए उपयुक्त
 
मिश्रित खेती  के लिए उपयुक्त

  1. बीज दर: 20 किलो प्रतf हेक्टेयर
  2. उर्वरक:

    उर्वरक

        मात्रा

     जीवाणु खाद

यूरिया

सिंगल सुपर फॉस्फेट

म्यूरियट ऑफ पोटाश

    44 क्विंटल/ हेक्टेयर
  
   250 क्विंटल/ हेक्टेयर
  
 34 क्विंटल/ हेक्टेयर

 

बुआई से पहले बीज को
जीवाणु खाद (राईजोबियम
कल्चर) से उपचार करना लाभदायक है।

(च) निकाई-गुडाई: दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता है। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के 25 से 30 दिनों बाद एवं दूसरी 40 से 45 दिनों बाद।

  • कटनी, दौनी एवं बीज भंडारण : अरहर की फली जब पक जाये तो हँसुएँ से पौधों को काटकर धूप में सुखा दें। डंडे के सहारे पौधों को पीटकर दाना अलग कर लें। अरहर के दानें धूप में अच्छी तरह सुखाकर भंडारण करें।

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