उरद
कृषि कार्य :
- जमीन की तैयारी : दो तीन बार देशी हल से खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा चला दें। जुताई के समय गोबर को सड़ी खाद 5 गाड़ी प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में अच्छी तरह मिला दें। उरद ऊँची जमीन की फसल है, अत : खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए।
- बोआई के समय : बुआई का उचित समय मध्य जून से मध्य जुलाई तक
2. उरद विलम्ब से बुआई के लिए भी उपयुक्त है। मध्य अगस्त तक बुआई करके अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।
(ग) उत्रत किसम :
| न्नत किस्में |
बुआई की दूरी |
तैयार होने का |
औसत उत्पादन |
विशेष गुण |
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टी-9, पंत,यू-19 |
30 x10 सें.मी. |
75 से 80 दिन |
15-20 |
रोग अवरोधी फल्लियों का एक |
(घ) बीज दर : 30 किलो प्रती
हेक्टेयर
(ङ) उर्वरक :
उर्वरक |
बोने के समय |
रोपनी के समय |
|
यूरिया |
44 कि./ हे. |
बुआई से पहले बीज को |
निकाई-गुडाई : दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता है। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के 20 दिनों बाद एवं दूसरी 40 दिनों बाद करना लाभप्रद है ।
कटनी, दौनी एवं बीज भंडारण :
उरद की फलियाँ एक बार पक कर तैयार हो जाती है। पकने पर फल्लियों का रंग
काला हो जाता है एवं पौधा भी पीला होने लगता है।
पौधों की कटाई एक बार हँसुए के द्वारा करके धूप में सुखाने चाहिए। दौनी
करके दाना अलग कर लेना उचित है। दानों को अच्छी तरह धूप में सूखाकर भंडारण
करें।

