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कुलथी

कृषि कार्य :

  1. जमीन की तैयारी : दो तीन बार देशी हल से खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा चला दें। कुलथी की खेती ऊपर वाली जमीन में होती है जिसमें पानी का जमाव नहीं होना चाहिए।
  2. बुआई के समय : बुआई के लिए उचित समय अगस्त है।

(ग) उत्रत किसम:

उन्नत किस्में

बुआई की दूरी

तैयार होने का
   समय

औसत उत्पादन
  (क्विं.हे.)

विशेष गुण

बिरसा कुलथी -1
मधु एवं बी.आर,
- 10

30 x10 सें.मी.

100 से 105 दिन

  10 - 12

विलम्ब से बुआई के
लिए उपयुक्त

(घ) बीज दर : 20 किलो प्रति हेक्टेयर
(ङ) उर्वरक :

उर्वरक

मात्रा

जीवाणु खाद

यूरिया
सिंगल सुपर फॉस्फेट
म्यूरियट ऑफ पोटाश

    44 कि./ हे.
   250 कि./ हे. 
   34 कि./ हे.

बुआई से पहले बीज को
जीवाणु खाद (राईजोबियम
कल्चर) से उपचार करना लाभदायक है।  

निकाई-गुडाई : दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता है। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के 15-20 दिनों बाद एवं दूसरी 35-40 दिनों बाद करना लाभप्रद है।

कटनी, दौनी एवं बीज भंडारण : कुलथी की फलियाँ एक बार पक कर तैयार हो जाती है। पकने पर फलियों का रंग भूरा हो जाता है तथा पौधे भी पीले पड़ने लगते है। पके हुए पौधों को हँसुए से काट कर धूप में सुखा कर दौनी करके दाना अलग कर लें। कुलथी के दानों को धूप में अच्छी तरह सूखाकर भंडारण करें।


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