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गेहूँ

उन्नत प्रभेद

समय पर बुआई के लिए (सिंचित) : एच.डी.- 2733, एच.यू. डब्ल्यू– 468, एच.डी- 2402, पी. बी. डब्ल्यू -343, के-9107, के- 8804, एन, डब्ल्यू -1012, (उपज क्षमता 40-50 क्विं /  हे.)

विलंब से बुआई के लिए (सिंचित) : एच.डी- 2402, एच.यू. डब्ल्यू – 234, एच. पी. 1744, एच.यू. डब्ल्यू –2045, एच.डी- 2643 (गंगा), एन डब्ल्यू - 1014, पी. बी. डब्ल्यू -373, (उपज क्षमता 35-40 क्विं/ हे.)

समय पर (अक्तूबर से नवम्बर प्रारम्भ) बोआई के लिए (असिंचित): सी-306, के-8027, एच.डी. आर -77, के-8962, उपज क्षमता (20-25 क्विं/ हे.)

देर से (नवंबर का द्वितीय पखवाड़ा) बोआई के लिए (असिंचित) : के-8962 (इन्द्रा), जी. डब्ल्यू-173, डी.एल.-788-2, उपज क्षमता (15-20 क्विं/ हे.)

बीज दर : 125 किलोग्राम/ हेक्टेयर। पिछात बुआई के लिए बीज दर से 25 किलो वृद्धि करें। उपचारित बीजों का व्यवहार करें बीटावेक्स या बैविस्टीन की 2.5 ग्राम मात्रा एक किलो बीज हेतु पर्याप्त है।



बोआई हल के पीछे :

अवस्था

समय

दूरी

सिंचित

  1. समय से
  2. पिछात

  
असिंचित

 

 नवम्बर माह प्रथम पखवारा
25 दिसम्बर तक

अक्टूबर के अन्त से 10 नवंबर तक

 

22 सें.मी.
18-20 सें.मी.

22 सें.मी

उर्वरकों की मात्रा एवं प्रयोग विधि: प्रति हेक्टेयर 50-100 क्विंटल गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें। अधिक उत्पादनशील प्रभेदों के लिए (220 किलो यूरिया, 312 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट, 42 किलो म्यूरिएट ऑफ पोटाश) प्रति हेक्टेयर में दें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बोआई के समय दें। नाइट्रोजन की बची मात्रा प्रथम सिंचाई (20-25 दिन) के बाद, जब खेत में चलने लायक नमी हो, दें। सिंचित अवस्था में विलम्ब से बोआई वाली किस्मों के लिए 174 किलो यूरिया 250 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट 34 किलो म्यूरिएट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से दें।

असिंचित अवस्था के लिये 70 किलो यूरिया तथा 125 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट



सिंचाई

जल की उपलब्धता एवं फसल की आवश्यकतानुसार सिंचाई निम्नलिखित अवस्थाओं पर करें :

एक सिंचाई : क्राउन रूट निकलने और कल्ले पूर्ण होने के बीच।
दो सिंचाई   : क्राउन रूट निकलते समय और बालियाँ निकलते समय।
तीन सिंचाई : क्राउन रूट निकलते समय और बालियाँ निकलते समय और दानों में दूध आते समय
चार सिंचाई : क्राउन रूट निकलते समय, कल्ले पूर्ण होने पर, बालियाँ निकलते समय तथा दानों में दूध भरते समय।
पाँच सिंचाई : क्राउन रूट निकलते समय, कल्ले पूर्ण होने पर, तने में गाँठ बनते समय, बालियाँ निकलते समय एवं दानों में दूध आते समय
: सिंचाई : क्राउन रूट बनते समय, कल्ले पूर्ण होने पर, तने में गाँठ बनते समय, बालियों में फूल आते समय, दानों में दूध भरते समय और दानों के सख्त होते समय।

निकाई-गुडाई      : प्रथम सिंचाई के बाद मिट्टी भुरभुरी होने पर घास-पात निकाल दें।

कटनी-दौनी  : फसल पकते ही सुबह में कटनी करें।

भंडारण     : भंडार में रखने के पूर्व बीज को पूरी तरह धूप में सुखा लें।




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