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(क) अधिक उपजाऊ किस्म
1. बाला : यह बौने कद का किस्म है और इसके पौधे की ऊँचाई 85-90 सेंटी
मीटर होती है। बोआई से फसल तैयार होने तक 95-100 दिन लगते है। दाने का
आकार मध्यम-मोटा होता है। इसकी पैदावार 30-40 क्विंटल/हेक्टेयर होती है।
यह प्रभेद झारखंड की ऊँची जमीन में सीधी बोआई के लिए भी उपयुक्त है।
2. कावेरी : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 85-90 सें.मी। फसल तैयार होने की
अवधि 100- 105 दिन। दाना मध्यम आकार का और ऊपज क्षमता 30-40 क्विं./हे.
है। जमीन में सीधी बोआई के लिए भी उपयुक्त है।
3. बिरसा धान-101 : बौना कद। पौघे की ऊँचाई 85-90 से.मी.। अति-अगात
किस्म है क्योंकि फसल तैयार होने की अवधि 80-85 दिन है। दाना लम्बा-मोटा
आकार का और उत्पादक क्षमता 30-35 क्विं./हे. है। ऊँची जमीन सीधी बोआई के
लिये उपयुक्त है क्योंकि यह सूखा-अवरोधी किस्म है। यह किस्म गरमा-धान की
खेती करने के लिए उपयुक्त है। मिश्रित खेती एवं “कैश – क्रौप’’ लेने के
लिए उपयुक्त है।
4. बिरसा धान-102 : इसके पौघे लम्बे होते हैं तथा 90 से 100 दिनों में
परिपक्व होते हैं। बीज मोटा तथा दाने लाली लिये होता है। इसमे सूखा रोधी
क्षमता होती है तथा खर-पतवार से भी प्रतिस्पर्धा कर सकता है। लम्बी
प्रजाति होने के कारण इसमें नाईट्रोजन की मात्रा 30-40 क्विं./हे. मात्रा
देने से 20-25 क्विं./हे. उपज मिल जाती है।
5. बिरसा धान-105 : इसके पौघे अर्ध बौने (10-15 से.मी. ) बीज छोटे
पुष्ट तथा दाने सफेद होते है। 85 से 90 दिनों में परिपक्व होते हैं। यह
प्रजाति झुलसा, धड़-छेदक, गाल मिज के प्रति रोधी है। इसकी उपज क्षमता 3.2
से 3.5 टन / हेक्टेयर है। टांड़-2 के लिए उपयुक्त।
6. बिरसा धान-106 : इसके पौघे 75 से 80 सें.मी., बीज छोटे पुष्ट तथा
दाने सफेद होते है। 90 से 95 दिनों में परिपक्व होते हैं। औसत उपज 3.5 /
4.0 टन / हेक्टेयर तथा धड़-छेदक, गाल मिज और झुलसा के प्रति साधारण प्रति-
रोधी। टांड़ -2 के लिए उपयुक्त। सुखा के प्रतिरोधी।
7. बिरसा धान-107 : अर्ध बौना किस्म (65-70 से.मी.), बीज छोटे पुष्ट
तथा दाने सफेद होते है। 90 से 95 दिनों में परिपक्व होते हैं। उपज क्षमता
3.0 से 3.5 टन / हेक्टेयर। यह प्रजाति झुलसा, धड़-छेदक, गाल मिज के
प्रतिरोधी है तथा टांड़ -2 के लिए उपयुक्त तथा मध्यम भूमि (दोन-3) में रोप
के लिए भी उपयुक्त हैं।
8. पूसा 2-21 (कन्नाजी) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-95 से.मी. और फसल
तैयार होने की अवधि 105-110 दिन। दाना मध्यम-मोटा तथा उपज क्षमता 40-45
क्विंटल/हेक्टेयर। छोटा नागपुर के दोन-3 में रोपा के लिए तथा गरमा-मौसम
में भी खेती के लिए उपयुक्त किस्म है।
9. साकेत-4 (सीआर 44-35) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-95 से.मी. और फसल
तैयार होने की अवधि 110- 115 दिन। दाना लम्बा महीन एवं उपज क्षमता 35-40
क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त किस्म है। गरमा-मौसम में
भी इसकी खेती की जा सकती है।
10. पूसा-33: अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 85-90 से.मी तथा फसल तैयार
होने की अवधि 100- 115 दिन। दाना लंबा, महीन एवं थोड़ा सुगंधित है। उपज
क्षमता 30-35 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त। उत्तरी
बिहार में गरमा-मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है।
11. अन्नदा (एम.डबल्वू.-10): मध्यम कद। पौधे की ऊँचाई 100-105 से.मी.
और फसल तैयार होने की अवधि 105-110 दिन है। इसके दाने छोटे एवं मोटे तथा
सफेद चावल है। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-3 में रोपा के लिए
उपयुक्त है।
12. बिरसा धान-201 : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 65-90 से.मी. और
फसल तैयार होने की अवधि 100- 105 दिन है। दाना मध्यम-मोटा तथा उपज क्षमता
35-40 क्विंटल/हेक्टेयर तथा दोन-3 में रोपा के लिए उपयुक्त तथा ऊँची जमीन
में सीधी बोआई भी की जा सकती है। झुलसा रोग तथा धड़-छेदक से मध्यम-अवरोधी
किस्म है।
13. रत्ना (सी आर 44-11) : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90-100
से.मी. और फसल तैयार होने का समय 120- 125 दिन है। दाना लम्बा-महीन तथा
उत्पादन क्षमता 40 -45 क्विंटल/हेक्टेयर है। झुलसा रोग तथा धड़-छेदक
से मध्यम-अवरोधी किस्म है। दोन-2 में रोपा के लिए उपयुक्त है।
14. अर्चना : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से. मी। फसल तैयार
होने का समय 40-45 दिन है। दाना लम्बा-महीन तथा उत्पादन क्षमता 40-45
क्विंटल/हेक्टेयर है। खरीफ में दोन -2 में रोपा के लिए उपयुक्त है।
15. सीता : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी। फसल तैयार
होने का समय 40-45 दिन है। दाना महीन एवं उत्पादन क्षमता
45-50 क्विंटल/हेक्टेयर है। पत्र-लाछन रोग के प्रति अधिक सहिष्णु है। खरीफ
में दोन-2 में रोपा के लिए उपयुक्त है।
16. जया : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-108 से.मी. है। दाना
मध्यम-मोटा एवं पैदावार 50-55 क्विंटल/हेक्टेयर है। खरीफ में दोन-2 में
रोपा के लिए उपयुक्त है।
17. आई.आर.-36 : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100 से.मी. व अवधि
115-120 दिन है। दाना लम्बा-महीन औऱ उपज क्षमता 55-40 क्विंटल/हेक्टेयर
है। बहुत तरह की बीमारी एवं कीड़े-मकोड़े से अवरोधी किस्म है। जिंक या
जस्ता की कमी वाले जमीन तथा अल्युमिनियम और जस्ता से टौक्सिक जमीन में भी
यह अच्छा पैदा देने की क्षमता रखता है। सूखा सहन करने की क्षमता है।
छोटानागपुर क्षेत्र के लिए दोन-2 में रोपा के लिए विशेष कर उपयुक्त है।
गरमा-मौसम में भी इसकी खेती की जा सकती है।
18. सुजाता (बी.जीर 90-2) : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 110-115
से.मी. तथा अवधि 125 दिन है। लम्बा-महीन एवं सफेद दाना उपज क्षमता 40-45
क्विंटल/हेक्टेयर है। दोन-2 जमीन में रोपा के लिए उपयुक्त है।
19. बिरसा धान-202 : मध्यम कद। पौधे की ऊँचाई 125-130 से.मी तथा अवधि
125 दिन है। चावल मध्यम एवं सफेद है। झुलसा एवं सांढ़ा कीट से मध्य अवरोधी
झुलसा रोग एवं धड़-छेदक से मध्य अवरोधी है। 60 कि.ग्रा. नेत्रजन पर भी यह
40-45 क्विंटल/हेक्टेयर उपज देती है। साथ-साथ मध्यम कद होने के कारण
पुआल की भी प्राप्ति होती है। यह छोटानागपुर क्षेत्र के दोन-2 जमीन में
रोपा के लिए उपयुक्त है। मध्यम जमीन में (दोन-2) इसकी सीधी बोआई संभव
है।
20. राजेन्द्र धान 201 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी फसल
तैयार होने की अवधि 135 दिन है। चावल मध्यम लंबा तथा पतला है।
पत्र-अंगमारी रोग के लिए अवरोधी है। दोन जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त
है।
21. राजेन्द्र धान-202 (आई.ई.टी.-2895) : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 90
-100 से.मी, दाना मध्यम। उपज क्षमता 35-40 क्विंटल/हेक्टेयर, फसल तैयार
होने की अवधि 130-135 दिन है। सांढ़ा कीट के लिए अवरोधी प्रभेद है और
छोटानागपुर के सांढ़ा कीट ग्रसित क्षेत्र में रोपा के लिए उपयुक्त।
22. आई.आर.-8 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई100-110 से.मी, फसल तैयार होने
की अवधि 130-135 दिन है। दाना मध्यम, उपज क्षमता 45-50 क्विंटल/हेक्टेयर।
दोन-2 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त।
23. राजश्री : मध्यम कद। पौघे की ऊँचाई 125-130 से.मी, आकार मध्यम एवं
सफेद चावल है। फसल तैयार होने की अवधि 135-140 दिन है। कम नेत्रजनीय खाद
पर भी 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर उपज देने की क्षमता है। दोन-2 एवं दोन-1 में
रोपा के लिए यह उपयुक्त।
24. महसूरी : लम्बा कद। पौधे की ऊँचाई 130-140 से.मी. तथा फसल तैयार
होने की अवधि 145-150 दिन। दाना मध्यम तथा उपज क्षमता 40-45
क्विंटल/हेक्टेयर, अधिक नेत्रजण देने पर भी 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर ही उपज
संभव है। यह प्रकाश –संवेदी एवं ठंढ-सहिष्णु है। अतः समय पर बिचड़े तैयार
करना आवश्यक है जिससे जुलाई महीने के अन्दर ही रोपनी की जा सके। दोन-1 में
रोपा के लिए उपयुक्त है। अधिक नेत्रजनीय खाद के प्रयोग से पौधे जमीन पर
गिर जाते हैं और उपज में काफी कमी आ जाती है।
25. पंकज : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. तथा फसल तैयार होने
की अवधि 155-160 दिन। दाना मध्यम मोटा और सफेद है। ठंढ-सहिष्णु एवं
प्रकाश-संवेदी होने के कारण यह अनुशंसा की गई है कि इसकी रोपनी 15 जुलाई
तक अवश्य कर लें। किसी कारण अगर जुलाई के अंत तक रोपनी करना संभव नहीं हो
पाये तो इसकी खनहीं करें। उपज क्षमता 50-60 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन
में रोपा के लिए यह उपयुक्त।
26. जगन्नाथ : अर्द्ध बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. मध्यम
लंबा एवं सफेद चावल है। फसल तैयार होने की अवधि 155-160 दिन है।
प्रकाश-संवेदी किस्म है। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त।
27. राधा : अर्द्ध बौना कद। पौघे की उँचाई 110-115 से.मी. तथा फसल
तैयार होने की अवधि 140 -145 दिन है। दाना मध्यम एवं चावल सफेद है।
पत्र-लक्षण से अवरोधी तथा उपज क्षमता 50-55 क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन
में रोपा के लिए यह उपयुक्त।
28. जयश्री : लम्बा कद और पौधे की ऊँचाई -130-140 से.मी. है। फसल तैयार
होने की अवधि 145-150 दिन एवं दाना मध्यम-महीन है। कम खाद पर भी यह 35-45
क्विंटल/हेक्टेयर पैदा देने की क्षमता है। अधिक नेत्रजनीय खाद के व्यवहार
से पौधे गिर जाते हैं। दोन-1 जमीन में सीधी बोआई के लिए यह उपयुक्त। यह
प्रकाश-संवेदी एवं ठंढ-सहिष्णु किस्म है। अत: समय पर उसकी खेती करना
आवश्यक है।
29. पानी धीन-2 : बौना कद। पौधे की ऊँचाई 100-110 से.मी. फसल तैयार
होने की अवधि 145-150 दिन है। दाना मध्यम एवं उपज क्षमता 45-50
क्विंटल/हेक्टेयर। दोन-1 जमीन में रोपा के लिए यह उपयुक्त है।
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