मूंग
कृषि कार्य :
- जमीन की तैयारी : दो-तीन बार देशी हल से खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा चला दें। जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद 5 गाड़ी प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में अच्छी तरह मिला दें। मूंग ऊँची जमीन में लगाई जाने वाली फसल है, अत : खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए।
- बोआई के समय : बुआई का उचित समय मध्य जून से मध्य जुलाई है।
मूंग गर्मी में बुआई के लिए उपयुक्त है। जिसकी बोआई मध्य फरवरी से मध्य
मार्च तक करना उत्तम होता है।
(ग) उत्रत किस्म :
उन्नत किस्में |
बुआई की दूरी |
तैयार होने का |
औसत उत्पादन |
विशेष गुण |
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के- 851, पी.एस |
30 x10 सें.मी. |
60 से 65 दिन |
12-15 |
रोग अवरोधी बोआई के |
(घ) बीज दर : 30
किलो प्रति हेक्टेयर
(ङ) उर्वरक :
उर्वरक |
मात्रा |
जिबाणु खाद |
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यूरिया |
44 कि./ हे. |
बुआई से पहले बीज को |
निकाई-गुडाई : दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता है। पहली निकाई-गुड़ाई बुआई के 15-20 दिनों बाद एवं दूसरी 35 दिनों बाद।
कटनी, दौनी एवं बीज भंडारण : मूंग की फलियाँ एक बार पक कर तैयार नहीं होती है। पकी हुई फलियों की तोड़ाई 2-3 बार में पूरा होता है। फलियों को धूप में अच्छी तरह सुखा कर दौनी करके दाना अलग कर लें। मूंग के दानों को धूप में सुखाकर भंडारण करें।

