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मटर

कृषि कार्य :
(क) जमीन की तैयारी : दो तीन बार देशी हल से खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा चला दें। मटर की खेती मध्यम जमीन में करें जहाँ पानी का जमाव नहीं हो।
(ख) बोआई के समय : बोआई के लिए उचित समय मध्य अक्टूबर से मध्य नवम्बर है।
(ग) उत्रत किसम :

उन्नत किस्में

बुआई की दूरी

तैयार होने का
   समय

औसत उत्पादन
  (क्विं.हे.)

विशेष गुण

आरकेल,
रचना, बी.आर.-12
स्वर्ण रेखा

25 x 15 सें.मी.
30  x 15

90 दिन
130 दिन

90 (हरी छीमी)
20-22 दाना

जल्दी तैयार होने वाली
किस्म रोग अवरोधी

बीज दर : 75 किलो प्रती हेक्टेयर
(ङ) उर्वरक :

    उर्वरक

     मात्रा

  जीवाणु खाद

यूरिया
सिंगल सुपर फॉस्फेट
म्यूरियट ऑफ पोटाश

 44 कि./ हे.
 250 कि./ हे. 
 34 कि./ हे.

बुआई से पहले बीज को
राईजोबियम कल्चर से उपचारित करें।    

(च) निकाई-गुड़ाई :दो बार निकाई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है। पहली निकाई -गुडाई बुआई के 25 दिनों बाद एवं दूसरी 40 दिनों बाद करना लाभप्रद है।
(छ) सिंचाई: मटर की अच्छी उपज के लिए 2-3 हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है।
(ज) कटनी, दौनी एवं बीज भंडारण : हरी छीमी की तोड़ाई 60-65 दिनों में शुरू हो जाता है। बीज प्राप्त करने के लिए मटर के पौधों की कटाई उस समय करें जब फलियाँ एवं पौधे पूर्ण रूप से सूख जाए। पौधों को धूप में अच्छी तरह सूखाकर दौनी करें। मटर को धूप में सूखाकर भंड़ारण करें।


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